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Sunday, January 20, 2019

संवाद

किसी से संवाद नहीं होता
समय के आगे थकी इस औरत का...
गाँव में जब तक था ...
लगता था सारा मेहनत यहीं की औरते करती हैं...
दो चार बाल्टी पानी कभी कुएं से खीच दिया,
तो पत्नी मुस्कुरा देती थी...
माँ कहती थी ...बउआ थक जाओगे...
और एक दिन...
पलायन कर गया था ...
कुछ ख़ुशी के लिए...
या फिर... 
छोडिये विवाद का विषय बन जायेगा...
मेरे मीडिया के दोस्त मुझसे ही सवाल करेंगे...
शहर आ कर अच्छा लगा...
यहाँ लाल किला था...
वहां गोल घर...
यहाँ नेशनल म्यूजियम है...
वहां जादूघर...
यहाँ...
नींद नहीं है...
वहां...
घोडे बेच कर सोता था...
यहाँ...
Lipid profile के टेस्ट हैं...
वहां कभी इसका नाम ही नहीं सुना था ...
यहाँ...
पसीना नहीं बहता...
वहां पसीने से नहा जाता था....
यहाँ... यहाँ... यहाँ...
देख रहा हूँ...
मेरी पत्नी पहले से ज्यादा थकी नज़र आती है...
माँ की उम्र ज्यादा है...
ये बहाना नहीं चलेगा...
यही सच है...
विवशताओं के झूठ का...
किसी से संवाद नहीं होता
समय के आगे थकी इस औरत का...

- अशोक कुमार अनुराग